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हरियाली के जरिए नए साल की शुभकामनाएं


नए बंगला वर्ष की शुरुआत में, न सहने योग्य प्रदूषण की पीड़ा में पीड़ित, व्यथित पृथ्वी को हरियालीकी अस्वास

में भर देनेकी प्रयास में हम भी शामिल हुए हैं। सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, मिथिला (नेपाल और बिहार के कुछ हिस्सों); इसके अलावा, बांग्लादेश में पहला बैशाख यानी

बांग्ला शुभ नबबर्ष को दिल से मनाया जाता है। इसके अलावा, चेन्नई में और पंजाब में भी मनाया जाता है, इस त्योहार को 'बैशाखी' के रूप में। जिसे केरल में विशु और तमिलनाडु में puthandu (പുത്തൻദു) के नाम में मनाया जाता है।

बांग्लादेश में, ईस दिन की शुभ-त्योहार पर रंग-बिरंगे मंगल शोलेयात्रा निकलता है। पश्चिम बंगाल के अधिकांश व्यापारियों ने लक्ष्मीजी और गणेशजी की पूजा के साथ व्यापार के नए खाते का उद्घाटन करते हैं। नई खाता यानी (হালখাতা) के नाम से भी जाना जाता है।

इतिहास के प्रसिद्ध राजा शशांक के समय से हालांकि इस त्योहारकी औपचारिक शुरुआत हुइ थी, मुगल युग में महत्वपूर्ण रूप में इस त्योहार को पालन करना ​​शुरू हुए है। तब, किराए के संग्रह में, अरबी सदी का पालन किया जाता था। हालांकि, उचित सौर कैलेंडर न होने के कारण, यह फसल चक्रों से मेल नहीं खाता था। स्वाभाविक रूप से, किराया प्रदान और किराए के संग्रह में एक समस्या होति थी।

फिर, बादशाह अकबर के निर्देश पर बंगाली नव वर्ष में किराया लेना शुरू किया गया। क्योंकि, इस बंगला साल का चक्र फसल चक्रों के साथ मेल खाता है।

यह आयोजन मूल रूप से मस्ती का, आनंद का उत्सव समारोह है। खाने-पीने की बहुत सारी आयोजन किया जाता है इस त्योहार में। विभिन्न व्यंजनों के साथ स्वादिष्ट भोज।

इस उत्सव के ठीक बाद, भयानक गर्मियों का दिन आता है। घर घर में, तुलसी के पेड़ को पानी की एक अंतहीन धारा की व्यवस्था की जाती है। अन्य पेड़में भी। वनगठन के माध्यम से मानव सभ्यता के उपभोग से सूखी दुनियाको हरियाली बनाने की प्रतिज्ञा का प्रयास का भी इस त्योहार में प्रारंभ होति है।

कई लोगों की तरह, हमने भी कुछ पेड़ लगाने की कोशिश की। जिनमें से अधिकांश सदाबहार वर्गकी हैं, लेकिन कुछ उस कक्षा में नहीं पढ़ते है। वीडियो देखें;

वीडियो:

उम्मीद है, आप इसे पहले ही पहचान चुके होंगे। यदि संभव हो, तो आप इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं। comment की रूप में।

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